मंगलवार, 25 अक्टूबर 2016

अहसास 46 - एक दिन

यह भी उड़ जायेंगे एक दिन ,
खोजने मंजिलें अपनी  कहीं  कुछ इस तरह ,
पीछे रह जाएँगी कुछ ढूंढती -झूझती यादें  जरा ,

पंख फैलाएंगे नीले गगन के पार जाने को ,
दिल को धड़कायेंगे सपने सुहाने  अपने सजाने को ,
कुछ न कह पाएंगे  उस पल  , खुद को बहलायेंगे कहके यूँ चल,
हम न उड़ पाये तो ये तो उड़ें ऊँचे जरा।
यह भी उड़ जायेंगे एक दिन ,

ख्याबों की डोर से दिल की पतंग बंधी, उड़ जाएगी
फीके गीले शिकवे ,झूठी हंसी बस , रह जाएगी ,
उन चमकती निगाहों मे जगह ढूंढे जरा ,
यह भी उड़ जायेंगे एक दिन  ,

उनकी कोमल सोच को सींचना ही होगा
कोपलें फूटें तक सब्र रखना होगा
धुप और छांव का फर्क बोलें जरा ,

यह भी उड़ जायेंगे एक दिन ,
खोजने मंजिलें अपनी  कहीं  कुछ इस तरह ,
पीछे रह जाएँगी कुछ ढूंढती -झूझती यादें  जरा ,