मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

Poetic talk - अहसास 66 -दरकार..

किसको दरकार है भीड़ में ढूँढे फिरे तुमको ,
हर कोई मसरूफ है ख़ुद में ही खोये ,ढूँढेते ख़ुदको ।

पसीने की लथपथ सांसें , नज़र में बेचैनी की बौछारें,
सहमता सा हुआ लहजा , उठाए हाथ ,दुआएँ माँगता रब को ।

अजब लरज है ज़ुबान में ख़ामोश ख़ुशबुएँ लिए
है धागे रिश्तों के जोड़े , मिठास फीकी लगे किसको ।

भरी जेबें हैं पर दिल ख़ाली सा लिए यह कौन शख़्स है ,
करे है गुफ़्तगू ख़ुद से,हँसे परेशान सा देखे जो परछाईं मे उनको ।

चलो अब मान जाएँ ज़िंदगी है चन्द कुछ सपनो से लफ़्ज़ों की ,
उन्हें समझाए कौन कि हक़ीक़त क्या है ,कुछ ख़बर नहीं उनको ।

नमालूम कब सियाही से शक्ल लफ़्ज़ों की ले ,सफ़हे पे उतर आएँ
यह कम्बख़्त दिल्लगी कमज़ोरी बन इख़्तियार कर लेगी उनको ।

खाएँ क़समें वो कितनी ही चाहें अब यक़ीन दिलाने की ,
भरे बाज़ार में तोहफो को बेफ़िकर घूरते लोग देखे है उनको ।

Krrishna bhatnagar
http://krrishnabhatnagar.wordpress.com/

Poetic talk -अहसास 65- ज़िंदगी..

पानी के रंग में यूँ घुली -मिली ज़िंदगी फुर्र हो गई ...
अभी तो शुरू ही हुई थी, कहाँ खो गयी,
धीरे से छुपती- छुपाती दूर हो गयी
पानी के रंग में यूँ घुली -मिली
ज़िंदगी फुर्र हो गई ..

थोड़ी सी उपर यह थोड़ी सी नीचे
गोते खिलाती बड़े ,
भागे है सब कुछ तेज़ी से इतना
हम तो रह जाएँ खड़े ,
कभी यह हँसाए कभी यह रुलाए ,
कभी बहलाए कभी हैं छकाये
पहेली है बन उड़ गयी
पानी के रंग में यूँ घुली -मिली
ज़िंदगी फुर्र हो गई ..

फूलों की ख़ुशबू में, गीतों की सरगम में ,
ओस की बूँदों से बनी ,
पंछी की बोली में , पानी की कलकल में
ख़ुशियों की डोरो से तनी ,
पुरवा को ले संग ,साँझ से चुरा रंग
बादल पे बैठ गुम गयी
पानी के रंग में यूँ घुली - मिली
ज़िंदगी फुर्र हो गई ..

Krrishna bhatnagar
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Poetic talk-अहसास 64- किसी के लिए ...


किसको फ़ुर्सत है सोचे फिरे किसी के लिए ,                                
ज़िंदगी यूँ ही छोटी पड़ती है सबको ख़ुद के लिए।

हक़ीक़त से रुबरू होने का जज़्बा नहीं रहा उनमें
जी तो रहें हैं यक़ीनन ही , पर नमालूम किसके लिए।

कितनी मरतबा समझाएँ उन्हें ,दिल के साफ़ हैं इतने,
कुछ तो क़द्र ख़ुद की भी करें,रहमोकरम खुदा के लिये।

होके गुम बैठे हैं इस भीड़ की तन्हाई में,
परवाह करे हैं ,ऐसा लगता है वो किसी के लिए।

कोई पूछे जो उनसे हाल ,तिलमिला जाएँ,
ज़ख़्म कुरेदें है कोई लगता दिल टटोलने के लिए।

बाद जाने के उन्हें याद करेंगे सब ही ,
यही रवायत है सदियों से फ़रिश्तों के लिए।

Krrishna bhatnagar
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