रुष्ट हूँ, संतुष्ट हूँ,
चेहरे से लगता पुष्ट हूँ,
पर क्या कहूँ ,ये बंदिशे सहूँ
जिंदगी के माने क्या हैं ,
घूमें फिरूँ ,खोजे फिरूं ।
छोटे छोटे लम्हात से ,
बातें करते ,हालात से ,
कोशिश करूँ ,जी जान से ,
घूरें सभी , हैरान से ,
जो चाहूं हूँ , वो ही करूँ
घूमें फिरूँ ,खोजे फिरूं ।
रुष्ट हूँ, संतुष्ट हूँ,
चेहरे से लगता पुष्ट हूँ,
पर क्या कहूँ ,ये बंदिशे सहूँ
जिंदगी के माने क्या हैं ,
घूमें फिरूँ ,खोजे फिरूं ।
ये तिश्नगी ,कैसे बुझे ,
कोई तो हल इसका सूझे ,
गर्मी सी है कुछ खून में
करता हूँ सब जूनून में
चलता रहूँ ,हँसता रहूँ
घूमें फिरूँ ,खोजे फिरूं ।
रुष्ट हूँ, संतुष्ट हूँ,
चेहरे से लगता पुष्ट हूँ,
पर क्या कहूँ ,ये बंदिशे सहूँ
जिंदगी के माने क्या हैं ,
घूमें फिरूँ ,खोजे फिरूं ।
चेहरे से लगता पुष्ट हूँ,
पर क्या कहूँ ,ये बंदिशे सहूँ
जिंदगी के माने क्या हैं ,
घूमें फिरूँ ,खोजे फिरूं ।
छोटे छोटे लम्हात से ,
बातें करते ,हालात से ,
कोशिश करूँ ,जी जान से ,
घूरें सभी , हैरान से ,
जो चाहूं हूँ , वो ही करूँ
घूमें फिरूँ ,खोजे फिरूं ।
रुष्ट हूँ, संतुष्ट हूँ,
चेहरे से लगता पुष्ट हूँ,
पर क्या कहूँ ,ये बंदिशे सहूँ
जिंदगी के माने क्या हैं ,
घूमें फिरूँ ,खोजे फिरूं ।
ये तिश्नगी ,कैसे बुझे ,
कोई तो हल इसका सूझे ,
गर्मी सी है कुछ खून में
करता हूँ सब जूनून में
चलता रहूँ ,हँसता रहूँ
घूमें फिरूँ ,खोजे फिरूं ।
चेहरे से लगता पुष्ट हूँ,
पर क्या कहूँ ,ये बंदिशे सहूँ
जिंदगी के माने क्या हैं ,
घूमें फिरूँ ,खोजे फिरूं ।