सूखे होंठों पे कितनी इल्तिज़ा लिए
आये थे वो बेकस ,कितने बेहाल ,
करने थे उनसे हमें अनजाने अनकहे
भूले बिसरे हुए, सैकड़ो सवाल ।
सूखे होंठों पे कितनी इल्तिज़ा लिए
आये थे वो बेकस, कितने बेहाल।
झुकी झुकी थी नज़र, भागते वक़्त संग ,
कहनी थी दास्ताँ , जुबाँ थी ख़ुश्क - तंग ,
बिन बुलाई हवा ,कितनी पुरजोर थी,
चाहे उड़ा ले जाना , सारी यादों को संग।
खामोशियां ही वहां ,जो थी कुछ बोलती,
पूछने को आये हमें कितने ही ख्याल ,
करने थे उनसे हमें अनजाने अनकहे
भूले बिसरे हुए, सैकड़ो सवाल ।
सूखे होंठों पे कितनी इल्तिज़ा लिए
आये थे वो ,बेकस कितने बेहाल ,
आंच सी जल रही, किस कदर दरमियाँ ,
सुलगी सी साँस में , दहकती गरमियाँ ,
राख में ढूंढ़ते चिंगारी हो बची ,
नादाँ दिल से छुपा , टूटता आशियाँ
अंजान से बने , तिनको को जोड़ते
जख्मो पे मलहम ले ,करते मलाल
करने थे उनसे हमें अनजाने अनकहे
भूले बिसरे हुए, सैकड़ो सवाल ।
आये थे वो ,बेकस कितने बेहाल ,
करने थे उनसे हमें अनजाने अनकहे ,
भूले बिसरे हुए, सैकड़ो सवाल ।
This is about a situation in which two people are madly in love ................
जवाब देंहटाएंdeep feelings
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