मंगलवार, 12 जुलाई 2016

अहसास 4 -उमंग


बजतें हैं ढोल ताशे ,महके हैं शोर  खासे ,
दिल में  उमंगें है लाई ,
ढोलक है धड़क धड़क , फिरके मन फडक फडक ,
खुशियों की घडी है आई ,
रोक न तू खुद को आज ,नाचता रह सारी रात ,
उठ के बिगुल तू बजा ,
दीवानों सा है लगे ,कहता जो कहता रहे,
शरमों  हया  बेच खाई।

 बजतें हैं ढोल ताशे ,महके हैं शोर  खासे ,
दिल में  उमंगें है लाई। 

गाये ,गाये जा तू  , किसको न किसकी पड़ी ,
सोचे इतना तू क्यों  , खुशियों की है फुलझड़ी ,
घूमें- नाचे- कूदे ,करना है जो भी  तू कर ,
फूटे खुशियां ऐसे, पटाखों की जो लड़ी 
धरती हिला दे आज ,सबको दिखा दे आज ,
चकरी है ऐसी घुमाई 
ढोलक है धड़क धड़क , फिरके मन फडक फडक ,
खुशियों की घडी है आई ,


बजतें हैं ढोल ताशे ,महके हैं शोर  खासे ,
दिल में  उमंगें है लाई ,
ढोलक है धड़क धड़क , फिरके मन फडक फडक ,
खुशियों की घडी है आई ,
रोक न तू खुद को आज ,नाचता रह सारी रात ,
उठ के बिगुल तू बजा ,
दीवानों सा है लगे ,कहता जो कहता रहे,
शरमों  हया बेच खाई 






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