बुधवार, 28 दिसंबर 2016

अहसास 54 - कुछ जरा .....

रातें  शर्मीली ,करवटों में लिटा के जरा ,
चंद लम्हे मिलें हैं ,सो लिपट कुछ  जरा,

जोड़ें जाएँ यूँ सपनो को खींच खींच के ,
ले रज़ाई की गर्मी ओढ़ ले कुछ जरा ,

आसमानों से ऊंची ख्वाईशें हैं लिए ,
चल जमीनों की धुल छांट लें कुछ जरा ,

तेरे माथे पे  झलकी शिकन क्यों भला ,
क्या कमी रह गयी , कुछ बता तो जरा ,

मेरे दिन रात घूमें तेरे इर्द -गिर्द ही ,
 है मुहब्बत यह कैसी ,समझा कुछ  जरा ,


मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

अहसास 52 - तेरा ख्याल आ गया......

कुरमुरी धुप तले ,आँगन में लेटे  हुए, तेरा ख्याल आ गया ,
बंद आँखों ने तसव्वुर किया ,खुमार आ गया ,
तेरा ख्याल आ गया ........ 

नादानियाँ कितने करें हैं ,लोग कहते थक गए,
तोहमतें तो हैं लाज़िमी, मुहब्बत का  जो नाम आ गया ,
तेरा ख्याल आ गया ........ 

कोशिशें नाकाम रहीं , उन बंदिशों को तोड़ने की ,सरासर ही,
इस जूनून के बुखार का क्या करें , फिर वही  सवाल आ गया,
तेरा ख्याल आ गया ........ 

हवाओं से ओस की नमी ले, रातें करे हैं बातें देर तक  ,
है खुशनुमा से यह मंज़र ,चाँद तारों को भी करार आ गया,
तेरा ख्याल आ गया ........ 

रोजमर्रा की जरूरतों के बोझ से दबा ,खुश हूँ  बेहद फिर भी ,
एक तेरा साथ  ही काफी है , मंज़िलों का दौर आ गया ,
तेरा ख्याल आ गया ........


शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

अहसास 51 -लालटेन -a mischievous dance song

तेरी ऑंखें हैं या लालटेन ,
मेरे दिल का चुरा लिया चैन ,
मुझे सूझे न कुछ , जले आग बिना बुझ
बजे दिमाग का है जो बैंड
तेरी ऑंखें हैं या लालटेन ,
मेरे दिल का चुरा लिया चैन

चाल है तेरी मतवारी यूँ  , दिल मेरा धड़काये ,
कितना रोकूँ सांसो को मैं ,यह तो बढ़ -बढ़ जाएं ,
मोटे -मोटे चितवन से जो बाण चलाये पुरजोर ,
तेरी ऑंखें हैं या लालटेन ,
मेरे दिल का चुरा लिया चैन  

बात करें तो, बोले क्या है, हमको समझ न आये ,
हम तो तेरी भोली सूरातिया में खो -खो जाये ,
पलक न झपके, ऐसे देखें, शर्माएं भर भर के
तेरी ऑंखें हैं या लालटेन ,
मेरे दिल का चुरा लिया चैन

अहसास -50 -जी ले जरा .......

जी ले जरा ,
इन आंसूओं को ,
पी ले जरा ,हंसी में मिला तू ,
यह दूरियां ,नज़दीकियां ,
बन जाएँगी , एक दिन जरूर ,
तू हौसला ,खुद पे यकीं,
न छोड़ना , लेके जूनून,
जी ले जरा........ जी ले  जरा  .....

धीरे -धीरे, यह आंच जो  दिल में तेरे, है जल रही ,
बुझने न  देना , देके हवा, चाहे जो कर , हर बार ही ,
थम जा जरा ,लपटों में  बदलेगी, एक दिन जरूर ,
तू हौसला ,खुद पे यकीं,
न छोड़ना , लेके जूनून,

जी ले जरा........ जी ले  जरा  ....

आसमां के ,नीले रंग जैसा, फैलेगा तेरा रंग
सूरज के जैसा ,चमकेगा ,तारों को लेके संग ,
चारो दिशाओं और पंच  तत्वों से मिलके गूंजे जरूर ,
तू हौसला ,खुद पे यकीं,
न छोड़ना , लेके जूनून,
जी ले जरा........ जी ले  जरा  ..... 

गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

अहसास 49- नाराज


तुम अगर  नाराज भी होते हो, तो अच्छा लगता है ,
उस खलिश के बाद प्यार, फिर  से नया सा  लगता है.
तुम अगर  नाराज भी...................

तुम एक सुरूर हो ,जूनून हो , दीवानगी की तह तक ,
तुम्हे बैठाके करीब, महसूस करें अच्छा सा  लगता है. ,
तुम अगर  नाराज भी   ......

कोई वजह तो होनी चाहिए ख्यालो में आने को ,
खुशबू बदन की महके हैं यूँ कि अच्छा सा  लगता है. ,
 तुम अगर  नाराज भी  ......

तुम्हारी आँखों में क्यों उमड़ा एक सैलाब सा भर है ,
मैं उनमे डूब जाऊँ  उम्र भर ,अच्छा सा  लगता है.
तुम अगर  नाराज भी   ......

तुम्हारा यूँ चिपटना और दुबकना आहटों पे हर ,
डराना धोखे से ,रूठना- मनाना ,अच्छा ,सा  लगता है.
 तुम अगर  नाराज भी  ......