गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

अहसास 49- नाराज


तुम अगर  नाराज भी होते हो, तो अच्छा लगता है ,
उस खलिश के बाद प्यार, फिर  से नया सा  लगता है.
तुम अगर  नाराज भी...................

तुम एक सुरूर हो ,जूनून हो , दीवानगी की तह तक ,
तुम्हे बैठाके करीब, महसूस करें अच्छा सा  लगता है. ,
तुम अगर  नाराज भी   ......

कोई वजह तो होनी चाहिए ख्यालो में आने को ,
खुशबू बदन की महके हैं यूँ कि अच्छा सा  लगता है. ,
 तुम अगर  नाराज भी  ......

तुम्हारी आँखों में क्यों उमड़ा एक सैलाब सा भर है ,
मैं उनमे डूब जाऊँ  उम्र भर ,अच्छा सा  लगता है.
तुम अगर  नाराज भी   ......

तुम्हारा यूँ चिपटना और दुबकना आहटों पे हर ,
डराना धोखे से ,रूठना- मनाना ,अच्छा ,सा  लगता है.
 तुम अगर  नाराज भी  ......

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