बैठे -बैठे यूँ ही चलो कुछ मुस्कुरा लें हम ,
थोड़ा हंस लें खोल के जी कुछ गुनगुना लें हम,
भागते लम्हो को मुठ्ठी में पकड़कर बांधके ,
भरके ,चमकती रोशनी, जुगनू बनालें हम।
बैठे- बैठे यूँ ही चलो................
हाथ को रुखसार पे रख के क्यों सोचे देर तक ,
माथे की गहरी लकीरों को चढ़ा के भाल तक
लाल स्याही से भरी आँखों को कुछ हंसालें हम,
थोड़ा हंस लें खोल के जी कुछ गुनगुना लें हम,
बैठे -बैठे यूँ ही चलो................
रेत के घर को बचाएगा भला तू कब तलक ,
यह तो उलझी भूलभुलैया ,काहे फिरता तू भटक.
ओस की बूँदे को गिनते ,रात हो जाएगी नम
थोड़ा हंस लें खोल के जी कुछ गुनगुना लें हम,
बैठे- बैठे यूँ ही चलो................
सुबहो से सहर तलक गिनता फिरे क्यों तू समय
सांस फूली -चाल बहकी धड़कने बढ़ती, झूमे ,
होश में बेहोश है ,थाम ले अपने कदम
थोड़ा हंस लें खोल के जी कुछ गुनगुना लें हम.
बैठे -बैठे यूँ ही चलो................
बैठे- बैठे यूँ ही चलो कुछ मुस्कुरा लें हम ,
थोड़ा हंस लें खोल के जी कुछ गुनगुना लें हम,
भागते लम्हो को मुठ्ठी में पकड़कर बांधके ,
भरके ,चमकती रोशनी, जुगनू बनालें हम।
थोड़ा हंस लें खोल के जी कुछ गुनगुना लें हम,
भागते लम्हो को मुठ्ठी में पकड़कर बांधके ,
भरके ,चमकती रोशनी, जुगनू बनालें हम।
बैठे- बैठे यूँ ही चलो................
हाथ को रुखसार पे रख के क्यों सोचे देर तक ,
माथे की गहरी लकीरों को चढ़ा के भाल तक
लाल स्याही से भरी आँखों को कुछ हंसालें हम,
थोड़ा हंस लें खोल के जी कुछ गुनगुना लें हम,
बैठे -बैठे यूँ ही चलो................
रेत के घर को बचाएगा भला तू कब तलक ,
यह तो उलझी भूलभुलैया ,काहे फिरता तू भटक.
ओस की बूँदे को गिनते ,रात हो जाएगी नम
थोड़ा हंस लें खोल के जी कुछ गुनगुना लें हम,
बैठे- बैठे यूँ ही चलो................
सुबहो से सहर तलक गिनता फिरे क्यों तू समय
सांस फूली -चाल बहकी धड़कने बढ़ती, झूमे ,
होश में बेहोश है ,थाम ले अपने कदम
थोड़ा हंस लें खोल के जी कुछ गुनगुना लें हम.
बैठे -बैठे यूँ ही चलो................
बैठे- बैठे यूँ ही चलो कुछ मुस्कुरा लें हम ,
थोड़ा हंस लें खोल के जी कुछ गुनगुना लें हम,
भागते लम्हो को मुठ्ठी में पकड़कर बांधके ,
भरके ,चमकती रोशनी, जुगनू बनालें हम।
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