शनिवार, 25 मार्च 2017

अहसास 63 - ख्वाइशें

आंख  भर आई क्यों  फिर से ,
साँस है कुछ गुनगुनी
 मुड़के देखें किस वजह से
ख्वाइशें  सब  अनसुनी ,

जान जैसे पावों के जानिब निकल के जा  रही ,
धड़कनो को थाम लूँ , कमबख्त जल्दी  कर रही,
है लहू में गर्मिंयां ,रगो में बहता खलूस से ,
आंख में उतरे है आंसू की जगह ले   तनतनी
मुड़के देखें किस वजह से
ख्वाइशें  सब  अनसुनी,

कांपती आवाज़ से गाऊं ग़ज़ल किसके लिए
दर्द में डूबी हुई हर शाम को कैसे जिए
 कोई शाना ,ढूंढ़ते फिरते भला कब तक फिरें ,
है अधूरी सी कहानी कोशिशें जो न  बनी
,मुड़के देखें किस वजह से
ख्वाइशें  सब  अनसुनी।



अहसास 62 -फागुन

रंग बरसे भीगे भर आसमानो से ,
ख़ुशीयों की  पिचकारी , फागुन के गानो से
भरके तू  मूठठी अबीर - गुलाल,
बेफ़िकर होके उड़ा आज यार

होली की मस्ती को ,घोटके  पी ले
शिकवे गिले भूल इस पल को जीले ,
भीगले गूँजियों की मीठी सी ख़ुशबू में ,
दाहिबड़े के संग गाजर की कंज़ियों में,
बेसुध हवाओं की होली की गूँजों में
तू भी मिला अपनी आवाज यार ..
बेफ़िकर होके उड़ा आज  यार

बनके तू रंग रसिया , ढोलक की थाप पर
ख़ुशियों के मन बसिया , गाढ़े रंगो की छाप पर
 फागुन के गीतो पे सबको नचाके
 टेसु के फूलों के रंग को घुला के
ग़ुब्बारे फोड़ ले यार ,

 बेफ़िकर होके उड़ा आज यार


अहसास 61 -इशारे से - a song of love.


आँखों के इशारे से ,
पलकों के किनारे से ,
दूरी से करो न बातें,
पास आओ बहाने से. ........
आँखों के इशारे से ........

महसूस करें तेरे
हाथों को लगाए बिन
सिहरन सी चढ़े तन मे ,
बहके मन हर पल - छिन ,
बाँहों में छुपा लें आ ,
तुझे चुरा ख्यालों से ,
आँखों के इशारे से ........


अठखेलिया हैं खेले
बालों की है लट रुख से ,
चेहरा है कँवल खिलता
सावन की खिली रुत से
परछाई से बातें कर ,
पहुंचाएं दीवारों से ,
आँखों के इशारे से ........








गुरुवार, 23 मार्च 2017

अहसास 60- एक चुभन

झिलमिल झिलमिल चमके तारे ,
आसमां जैसे  करे इशारे ,
किसके आने की आहट  में
दिल के आगे हम भी हारे


इसको  कहते क्या   प्यार ये
खुद  से कैसा इकरार यह
मीठी  सी चुभन, फिसले हैं मन
चढे  नशा   करे  बेक़रार यह
आँखें  हैं लाल ,बिखरे हैं बाल ,
दुनिया लगती घूमी हमारे
किसके आने की आहट  में
दिल के आगे हम भी हारे

किस ओर चले, कुछ ठौर  नहीं ,
चलता खुद पे कोई जोर नहीं ,
बहके क़दमों को बांधे क्यूँ ,
मसला है दिल का, कुछ और नहीं
सतरंगी से नभ में  उड़ती
बिन पंख खोल हवा के  सहारे
किसके आने की आहट  में
दिल के आगे हम भी हारे