आंख भर आई क्यों फिर से ,
साँस है कुछ गुनगुनी
मुड़के देखें किस वजह से
ख्वाइशें सब अनसुनी ,
जान जैसे पावों के जानिब निकल के जा रही ,
धड़कनो को थाम लूँ , कमबख्त जल्दी कर रही,
है लहू में गर्मिंयां ,रगो में बहता खलूस से ,
आंख में उतरे है आंसू की जगह ले तनतनी
मुड़के देखें किस वजह से
ख्वाइशें सब अनसुनी,
कांपती आवाज़ से गाऊं ग़ज़ल किसके लिए
दर्द में डूबी हुई हर शाम को कैसे जिए
कोई शाना ,ढूंढ़ते फिरते भला कब तक फिरें ,
है अधूरी सी कहानी कोशिशें जो न बनी
,मुड़के देखें किस वजह से
ख्वाइशें सब अनसुनी।
साँस है कुछ गुनगुनी
मुड़के देखें किस वजह से
ख्वाइशें सब अनसुनी ,
जान जैसे पावों के जानिब निकल के जा रही ,
धड़कनो को थाम लूँ , कमबख्त जल्दी कर रही,
है लहू में गर्मिंयां ,रगो में बहता खलूस से ,
आंख में उतरे है आंसू की जगह ले तनतनी
मुड़के देखें किस वजह से
ख्वाइशें सब अनसुनी,
कांपती आवाज़ से गाऊं ग़ज़ल किसके लिए
दर्द में डूबी हुई हर शाम को कैसे जिए
कोई शाना ,ढूंढ़ते फिरते भला कब तक फिरें ,
है अधूरी सी कहानी कोशिशें जो न बनी
,मुड़के देखें किस वजह से
ख्वाइशें सब अनसुनी।
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