गुरुवार, 23 मार्च 2017

अहसास 60- एक चुभन

झिलमिल झिलमिल चमके तारे ,
आसमां जैसे  करे इशारे ,
किसके आने की आहट  में
दिल के आगे हम भी हारे


इसको  कहते क्या   प्यार ये
खुद  से कैसा इकरार यह
मीठी  सी चुभन, फिसले हैं मन
चढे  नशा   करे  बेक़रार यह
आँखें  हैं लाल ,बिखरे हैं बाल ,
दुनिया लगती घूमी हमारे
किसके आने की आहट  में
दिल के आगे हम भी हारे

किस ओर चले, कुछ ठौर  नहीं ,
चलता खुद पे कोई जोर नहीं ,
बहके क़दमों को बांधे क्यूँ ,
मसला है दिल का, कुछ और नहीं
सतरंगी से नभ में  उड़ती
बिन पंख खोल हवा के  सहारे
किसके आने की आहट  में
दिल के आगे हम भी हारे

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