शुक्रवार, 27 जनवरी 2017

अहसास 57 -मशविरे

मशविरे देते रहते है आजकल मुझको बहुत चलते,
खुदा कोई तो होता जिसे कुछ मैं भी दे पाता,

पीठ पीछे हैं जो बोलें बुराइयों का मैं हूँ पुतला ,
सबको ख़ुश रखना है कैसे ,काश मुझको सिखा जाता,

कुओं से रहट की मीठी सी सुगंध पानी में है घुली,
परिंदों के संग पेड़ों की शाख़ों पे मैं भी उड़ पाता .

लीपे - पुते हुए आँगन से दहलीज़ तक है सजा रास्ता,
कोई आने को है मेहमान नया  यह बता जाता .


शनिवार, 7 जनवरी 2017

अहसास 56-उम्र जीना चाहता हूँ ....

मैं फिर से उम्र जीना चाहता हूँ ,
दबी हर ख्वाइश को पूरा करना चाहता हूँ।
मैं फिर से उम्र जीना चाहता हूँ , ...................

हैं  कुछ चाहत भी ऐसी ,समझने में गुजर जाती  हैं सुबहो शामें ,
मैं   उनकी ख्वाइशें पूरी करना चाहता हूँ
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ...................

पतंग सी बेपरवा उड़ती फिरें आसमानों मे  दूर तलक ,
रंग-बिरंगी सी खुशियां को जीना चाहता हूँ ,
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ,...................

टपकती छत की मरम्त के बावस्त कोई  पूछे तो कहता हूँ.,
मैं  उनमें बारिशों का मजा लेना चाहता हूँ
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ,...................

हूँ मैं बेबाक पर दिल का सफा ,बुरा मानेगे कब तक वो
जमी पे रहके ही मैं आसमा छूना चाहता हूँ ,
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ,...................



रविवार, 1 जनवरी 2017

अहसास 55 -happy new year

हवाओं में बहती एक  सुगंध  है  कुछ  नया परिवर्तन  लाने  की,
पानी  की  कल-कल में , गुड़ सा मीठा गुनगुनाने की, 
पुराने संदूक में दबी पड़ी  तस्वीरों के बोलने- चालने  की
सिरहाने रखी मेज की दराज़ में  ठुंसे हुये  कागजो के चिल्लाने की,
छत की टांड में दीमक लगी लकड़ियों के चरमराने की ,
चांदनी से बांध मुझको घेरकर नाचने -गाने ,
और पैर पटक ,कुछभी कर, अपनी जिद मनवाने की  ,

दीवार की कील पे से पूरानी तारीखेँ उतार कर नई  टाँग लूँ  ,
बासी-कड़वी यादों को झाड़कर उतार  दूँ , नयी ख़ुशियों को बाँट लूँ  , 
ज़िंदगी से  छीन के कुछ पल, सिर्फ़ अपने लिए माँग लूँ  ,
सुबह की धूप को मुट्ठी में बाँध लूँ  ओर कह दूँ  कभी ख़ुद को  भी ,  
happy new year 

टेढ़ी मेढ़ी पगडंडियों पे उन बिखरे पड़े ढेर सारे पत्तों से,
बात करती , मेरे पाँवों की नादान अठखेलियाँ ,
खेतों की मेड़ों पर बैठते- उठते ,पंख फड़फड़ाते ,चावों -चावों  करते परिंदे
कुहरे में लिपटी, ओस से भीगी -भीगी खुशगवार सुबह 
और मैं ,बोलना चाहते हैं आपको दिल की गहराइयों से ,
happy new year