हवाओं में बहती एक सुगंध है कुछ नया परिवर्तन लाने की,
पानी की कल-कल में , गुड़ सा मीठा गुनगुनाने की,
पुराने संदूक में दबी पड़ी तस्वीरों के बोलने- चालने की
सिरहाने रखी मेज की दराज़ में ठुंसे हुये कागजो के चिल्लाने की,
छत की टांड में दीमक लगी लकड़ियों के चरमराने की ,
चांदनी से बांध मुझको घेरकर नाचने -गाने ,
और पैर पटक ,कुछभी कर, अपनी जिद मनवाने की ,
दीवार की कील
पे से पूरानी तारीखेँ उतार कर नई टाँग लूँ ,
बासी-कड़वी यादों को झाड़कर उतार दूँ , नयी ख़ुशियों को
बाँट लूँ ,
ज़िंदगी
से छीन के कुछ पल, सिर्फ़ अपने
लिए माँग लूँ ,
सुबह
की धूप को
मुट्ठी में बाँध लूँ ओर कह दूँ कभी
ख़ुद को भी ,
happy new year
टेढ़ी मेढ़ी पगडंडियों पे
उन बिखरे पड़े ढेर सारे पत्तों
से,
बात करती , मेरे पाँवों की नादान अठखेलियाँ ,
खेतों की मेड़ों
पर बैठते- उठते ,पंख फड़फड़ाते ,चावों -चावों करते
परिंदे ,
कुहरे में लिपटी,
ओस से भीगी
-भीगी खुशगवार सुबह
और मैं
,बोलना चाहते हैं आपको दिल की गहराइयों से ,
happy new year