मैं फिर से उम्र जीना चाहता हूँ ,
दबी हर ख्वाइश को पूरा करना चाहता हूँ।
मैं फिर से उम्र जीना चाहता हूँ , ...................
हैं कुछ चाहत भी ऐसी ,समझने में गुजर जाती हैं सुबहो शामें ,
मैं उनकी ख्वाइशें पूरी करना चाहता हूँ
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ...................
पतंग सी बेपरवा उड़ती फिरें आसमानों मे दूर तलक ,
रंग-बिरंगी सी खुशियां को जीना चाहता हूँ ,
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ,...................
टपकती छत की मरम्त के बावस्त कोई पूछे तो कहता हूँ.,
मैं उनमें बारिशों का मजा लेना चाहता हूँ
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ,...................
हूँ मैं बेबाक पर दिल का सफा ,बुरा मानेगे कब तक वो
जमी पे रहके ही मैं आसमा छूना चाहता हूँ ,
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ,...................
दबी हर ख्वाइश को पूरा करना चाहता हूँ।
मैं फिर से उम्र जीना चाहता हूँ , ...................
हैं कुछ चाहत भी ऐसी ,समझने में गुजर जाती हैं सुबहो शामें ,
मैं उनकी ख्वाइशें पूरी करना चाहता हूँ
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ...................
पतंग सी बेपरवा उड़ती फिरें आसमानों मे दूर तलक ,
रंग-बिरंगी सी खुशियां को जीना चाहता हूँ ,
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ,...................
टपकती छत की मरम्त के बावस्त कोई पूछे तो कहता हूँ.,
मैं उनमें बारिशों का मजा लेना चाहता हूँ
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ,...................
हूँ मैं बेबाक पर दिल का सफा ,बुरा मानेगे कब तक वो
जमी पे रहके ही मैं आसमा छूना चाहता हूँ ,
मैं फिरसे उम्र जीना चाहता हूँ ,...................
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें