शनिवार, 25 मार्च 2017

अहसास 62 -फागुन

रंग बरसे भीगे भर आसमानो से ,
ख़ुशीयों की  पिचकारी , फागुन के गानो से
भरके तू  मूठठी अबीर - गुलाल,
बेफ़िकर होके उड़ा आज यार

होली की मस्ती को ,घोटके  पी ले
शिकवे गिले भूल इस पल को जीले ,
भीगले गूँजियों की मीठी सी ख़ुशबू में ,
दाहिबड़े के संग गाजर की कंज़ियों में,
बेसुध हवाओं की होली की गूँजों में
तू भी मिला अपनी आवाज यार ..
बेफ़िकर होके उड़ा आज  यार

बनके तू रंग रसिया , ढोलक की थाप पर
ख़ुशियों के मन बसिया , गाढ़े रंगो की छाप पर
 फागुन के गीतो पे सबको नचाके
 टेसु के फूलों के रंग को घुला के
ग़ुब्बारे फोड़ ले यार ,

 बेफ़िकर होके उड़ा आज यार


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