रंग बरसे भीगे
भर आसमानो से
,
ख़ुशीयों
की पिचकारी
, फागुन के गानो
से
भरके तू
मूठठी अबीर - गुलाल,
बेफ़िकर
होके उड़ा आज
यार
होली की मस्ती
को ,घोटके पी ले
शिकवे गिले भूल
इस पल को
जीले ,
भीगले गूँजियों की मीठी
सी ख़ुशबू में
,
दाहिबड़े
के संग गाजर
की कंज़ियों में,
बेसुध हवाओं की होली
की गूँजों में
तू भी मिला
अपनी आवाज यार
..
बेफ़िकर
होके उड़ा आज यार
बनके तू रंग
रसिया , ढोलक की
थाप पर
ख़ुशियों
के मन बसिया
, गाढ़े रंगो की
छाप पर
फागुन के गीतो
पे सबको नचाके
टेसु के
फूलों के रंग
को घुला के
ग़ुब्बारे
फोड़ ले यार
,
बेफ़िकर होके उड़ा
आज यार
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