कुरमुरी धुप तले ,आँगन में लेटे हुए, तेरा ख्याल आ गया ,
बंद आँखों ने तसव्वुर किया ,खुमार आ गया ,
तेरा ख्याल आ गया ........
नादानियाँ कितने करें हैं ,लोग कहते थक गए,
तोहमतें तो हैं लाज़िमी, मुहब्बत का जो नाम आ गया ,
तेरा ख्याल आ गया ........
कोशिशें नाकाम रहीं , उन बंदिशों को तोड़ने की ,सरासर ही,
इस जूनून के बुखार का क्या करें , फिर वही सवाल आ गया,
तेरा ख्याल आ गया ........
हवाओं से ओस की नमी ले, रातें करे हैं बातें देर तक ,
है खुशनुमा से यह मंज़र ,चाँद तारों को भी करार आ गया,
तेरा ख्याल आ गया ........
रोजमर्रा की जरूरतों के बोझ से दबा ,खुश हूँ बेहद फिर भी ,
एक तेरा साथ ही काफी है , मंज़िलों का दौर आ गया ,
तेरा ख्याल आ गया ........
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