मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

अहसास 52 - तेरा ख्याल आ गया......

कुरमुरी धुप तले ,आँगन में लेटे  हुए, तेरा ख्याल आ गया ,
बंद आँखों ने तसव्वुर किया ,खुमार आ गया ,
तेरा ख्याल आ गया ........ 

नादानियाँ कितने करें हैं ,लोग कहते थक गए,
तोहमतें तो हैं लाज़िमी, मुहब्बत का  जो नाम आ गया ,
तेरा ख्याल आ गया ........ 

कोशिशें नाकाम रहीं , उन बंदिशों को तोड़ने की ,सरासर ही,
इस जूनून के बुखार का क्या करें , फिर वही  सवाल आ गया,
तेरा ख्याल आ गया ........ 

हवाओं से ओस की नमी ले, रातें करे हैं बातें देर तक  ,
है खुशनुमा से यह मंज़र ,चाँद तारों को भी करार आ गया,
तेरा ख्याल आ गया ........ 

रोजमर्रा की जरूरतों के बोझ से दबा ,खुश हूँ  बेहद फिर भी ,
एक तेरा साथ  ही काफी है , मंज़िलों का दौर आ गया ,
तेरा ख्याल आ गया ........


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