यहाँ वहां दोनों जहाँ में
सोचे काहे दरमियां में
तू ही तू है , हर जगह,
खुद में ही तू एक कारवां।
चलचला तू चल, सोच न रुकने की
कल सुबह सूरज , उगेगा सुनने की ,
उसकी तरह तू ,भी है चमक कर ,
भागेंगा सरपट , यूँ आसमां में ,
यहाँ वहां दोनों जहाँ में
सोचे काहे दरमियां में
तू ही तू है , हर जगह,
खुद में ही तू एक कारवां।
सिलसिला ये चला , तो न रुक पायेगा ,
एक पल भी यहाँ, न तू थम पाएगा ,
हर लम्हा होगा ,तेरी कहानी
चूमेगा मंजिल, रब की जुबां मे ,
यहाँ वहां दोनों जहाँ में
सोचे काहे दरमियां में
तू ही तू है , हर जगह,
खुद में ही तू एक कारवां
सोचे काहे दरमियां में
तू ही तू है , हर जगह,
खुद में ही तू एक कारवां।
चलचला तू चल, सोच न रुकने की
कल सुबह सूरज , उगेगा सुनने की ,
उसकी तरह तू ,भी है चमक कर ,
भागेंगा सरपट , यूँ आसमां में ,
यहाँ वहां दोनों जहाँ में
सोचे काहे दरमियां में
तू ही तू है , हर जगह,
खुद में ही तू एक कारवां।
सिलसिला ये चला , तो न रुक पायेगा ,
एक पल भी यहाँ, न तू थम पाएगा ,
हर लम्हा होगा ,तेरी कहानी
चूमेगा मंजिल, रब की जुबां मे ,
यहाँ वहां दोनों जहाँ में
सोचे काहे दरमियां में
तू ही तू है , हर जगह,
खुद में ही तू एक कारवां
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