बारिशें गुनगुना यूँ रहीं है , जैसे बुँदे नाह रहीं हैं ,
भीगी भीगी, खुद में सिमटी , खुद ही खुद में, गा रहीं है.
झूमती ,हवा में घूमती, सनसनाती हुई उड़ रहीं हैं ,
छोटी हैं ,थोड़ी सी मोटी हैं,अठखेलियां कर रहीं हैं ,
हवा के साथ में ,जोरो से नाचती ,
हाथ मे हाथ को उसके यूँ बांधती ,
घुंघरुओं की तरह बज रहीं हैं ,
बारिशें गुनगुना यूँ रहीं है , जैसे बुँदे नाह रहीं हैं ,
भीगी भीगी, खुद में सिमटी , खुद ही खुद में, गा रहीं है.
शाख पत्तो से लिपटे-चिपटे ,पेड़ों के संग जैसे लड़के ,
मीठी धुन पे ,मिस्री घोले ,
हाथ फैलाए ,दिल को खोले ,
बिन हया मस्तियाँ बुन रहीं है ,
बारिशें गुनगुना यूँ रहीं है , जैसे बुँदे नाह रहीं हैं ,
भीगी भीगी, खुद में सिमटी , खुद ही खुद में, गा रहीं
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