जीवन है सफर ऐसा, कोई न समझ पाए
हर रोज नया है कुछ , बातें नई सिखलाये।
चलते चलते हर पल ,कहता है की चलता रह ,
थमना हैं नहीं एक पल , चलना है की चलता रह ,
फुरसत को तलाशे क्यों , घूमे फिरता है तू
थकने का समय किसपे , जोरो से है चिल्लाए,
जीवन है सफर ऐसा, कोई न समझ पाए
हर रोज नया है कुछ , बातें नई सिखलाये।
आँखों मे भरी है कुछ ,कूदी हुई किलकारी ,
होटों पे बसी मीठी, गीतों की सदा प्यारी ,
उड़ने को करे है मन ,पर हैं कहीँ मिल जाएँ ,
बादल को मैं छू लूँ , मुठ्ठी मैं समा जाये ,जीवन है सफर ऐसा, कोई न समझ पाए
हर रोज नया है कुछ , बातें नई सिखलाये।
भूला बिसरा बचपन , आंखों में उतर आता ,
पेड़ों के झुरमुट का, मंज़र है बुला जाता ,
चोटों का , डाटों का , पापा के चांटो का ,
माँ के हांथों का प्यार , है याद बहुत आये
जीवन है सफर ऐसा, कोई न समझ पाए
हर रोज नया है कुछ , बातें नई सिखलाये।
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