सुबह सवेरे रोज ही उठकर , सूरज अपनी किरणे लेकर ,
बिना बुलाए आ जाता है , जग उजियारा कर जाता है।
कौन उसे है रोज उठाता, क्या कोई अलार्म बजाता ,
कैसे फिर वो उठ जाता है, भर भर रोशनी को लाता है
कैसे वो पाबंद है इतना ,समय चक्र चलता है जितना ,
चाहे कोई कुछ भी बोले , वो बस अपना काम टटोले ,
कुछ भी होय,दुनिया सोए ,वो बस अपने लक्ष्य में खोय ,
कर्म करे जा फल की इच्छा, मत कर, वो माने लगता है ,
धरती को रोशन कर दिन भर, साँझ ढले जाने लगताहै ,
आसमान को लाल बना कर ,सागर की सीमा से मिला कर ,
कल आने का वादा करके , मुंह फेरकर सो जाता है ,
सूरज कुछ सिखला जाता है।
सुबह सवेरे रोज ही उठकर , सूरज अपनी किरणें लेकर ,
बिना बुलाए आ जाता है , जग उजियारा कर जाता है।
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