शनिवार, 16 जुलाई 2016

अहसास 10- सूरज


सुबह सवेरे रोज ही उठकर , सूरज अपनी  किरणे  लेकर ,
बिना बुलाए आ जाता है , जग उजियारा  कर जाता है। 

कौन उसे है रोज उठाता, क्या कोई अलार्म बजाता ,
कैसे फिर वो उठ जाता है,  भर भर रोशनी को लाता है

कैसे वो पाबंद है इतना ,समय चक्र चलता है जितना ,
चाहे कोई कुछ भी बोले , वो बस अपना काम टटोले ,

कुछ भी होय,दुनिया सोए ,वो बस अपने लक्ष्य में खोय ,
कर्म करे जा फल की इच्छा,  मत कर, वो माने लगता है ,

धरती को रोशन कर दिन भर, साँझ ढले जाने लगताहै ,
आसमान  को लाल बना कर ,सागर की सीमा से मिला कर ,

कल आने का वादा करके , मुंह फेरकर सो जाता है ,
सूरज कुछ सिखला जाता है।

सुबह सवेरे रोज ही उठकर , सूरज अपनी किरणें  लेकर ,
बिना बुलाए आ जाता है , जग उजियारा  कर जाता है। 

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