मन पुलकित है तन उच्छ्वसित ,
साँसों की हर लय उल्लासित ,
रंग बिरंगी यह रुत है तरंगित,
नैनों में रचते क्या कल्पित
मचता चहुं ओर यह शोर कैसा ,
उतरे हो आकाश से देव जैसा ,
थिरके है पाँव मेरे बिन रुके क्यों ,
संगीत की लहरी बजती है छलकित ,
भाव विभोर मैं इतना हुआ कैसे ,
दिल में हिलोरें लहरों के जैसे ,
उड़ने लगूँ बादलों से जा मैं बोलूँ ,
बरसो के होली है तुम भी हो जागरित,
चाहूँ के मिलने को आऊँ तुम्हें मैं ,
शुभकामना दे गले लगाऊँ तुम्हें मैं ,
पर मेरी यादों को आँखों में बंद कर ,
रंग में भिगो मुझको करना अलंक्रित,
मन पुलकित है तन उच्छ्वसित ,
साँसों की हर लय उल्लासित ...
होली की ढेर सारी रंग -बिरंगी -मीठी शुभकामनाएँ -
Krishna BHATNAGR
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