आपकी फ़िक्र है मुझे ,
पर आशा करता हूँ आप अच्छे ही होंगे ,
इस अनचाहे -अनजाने संकट के दरम्यान,
ख़्याल रखें अपने और अपनो का ,
ज़िंदादिल उन ढेर सारे सपनों का ,
घर में बंद , बाहर निकलने के पाबंद ,
अपनी बदली दिनचर्या और अदले -बदले कामों के बीच ,
धूँड धूँड के करते रहते होंगे अपनी भूली -भली आदतों को सींच ,
इक जमाने बाद ,सब एक संग इकट्ठे , परिवार में इतने समय तक ,
अंताक्षरी, योगा ,इंटर्नेट सर्फ़िंग ,घर की सफ़ाई ,बर्तन -कपड़ों की धुलाई ,
पेड़ों में पानी , हौज़ी और देर तलक WhatsApp -न्यूज़ चैनल ख़बरों की दिल लगाईं ,
थोड़ी घबराहट भी हो जाती है कभी - कभी ,क्योंकि सब रुक गया हैं ,
और पता नहीं कब तक रुका रहेगा यूँ ही ,
या फिर कब परवाज़ पकड़ेगा उसी तरह फिर से ,
पर जब मैं आपको कहता हूँ ,सतर्क रहें ,सुरक्षित रहें और संयम रखें
तो लगता है जैसे ख़ुद को भी ढाँढस बंधा रहा हूँ कहीं भीतर से ,
आशाएँ है , कोई है ! जिसको देनी है ,तभी तो वो देगा बदले में मुझे भी ,
प्रार्थना करता हूँ ईश्वर से सबकी रक्षा करे और कल्याण हो ।
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