भागते- भागते , बैठलें कुछ जरा ,
ये फिसलता समय , कस पकड़ लें जरा ,
आस की गांठ को ,थोड़ी ढीली करें ,
पोटली है मुक्कदर की खोलें जरा
भागते- भागते बैठलें कुछ जरा ...........
कुछ तो ऐसा करें, हो मजा ढेर सा
खुदबखुद ही लगे, है सवा सेर सा ,
दिखने में कुछ नहीं ,सुनने में हो सरल ,
चाहे छोटा ही हो ,लगे बड़े घेर सा
दोस्तो की तरह, दिल को खोलें जरा ,
थोड़ी उनसे कहें ,सुन लें उनको जरा।
भागते- भागते बैठलें कुछ जरा ...........
बाँट लें जो मिलें , थोड़ा ही हो सही
जिसमें खुशियां मिलें ,काम होता वही
मंजिलों से नज़र , न कभी भी हटे ,
करना जो भी पड़े ,तोड़ें -जोड़ें वही ,
अक्स जो है जहन में , छाप दें वो जरा
दुनियादारी की छोड़ें , दिल की सुनलें जरा
भागते- भागते बैठलें कुछ जरा ...........
ये फिसलता समय , कस पकड़ लें जरा ,
आस की गांठ को ,थोड़ी ढीली करें ,
पोटली है मुक्कदर की खोलें जरा
भागते- भागते बैठलें कुछ जरा ...........
कुछ तो ऐसा करें, हो मजा ढेर सा
खुदबखुद ही लगे, है सवा सेर सा ,
दिखने में कुछ नहीं ,सुनने में हो सरल ,
चाहे छोटा ही हो ,लगे बड़े घेर सा
दोस्तो की तरह, दिल को खोलें जरा ,
थोड़ी उनसे कहें ,सुन लें उनको जरा।
भागते- भागते बैठलें कुछ जरा ...........
बाँट लें जो मिलें , थोड़ा ही हो सही
जिसमें खुशियां मिलें ,काम होता वही
मंजिलों से नज़र , न कभी भी हटे ,
करना जो भी पड़े ,तोड़ें -जोड़ें वही ,
अक्स जो है जहन में , छाप दें वो जरा
दुनियादारी की छोड़ें , दिल की सुनलें जरा
भागते- भागते बैठलें कुछ जरा ...........
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