नींद आ रही है , मुझको जोर से ,
आज जग गया था मैं तो भोर से ,
सारे दिन तो भागता मैं यूँ फिरा ,
सर पे डाले बोझ ,यूँ उठा -गिरा ,
सुबह से हुई जो शाम न खबर ,
सो गया था राह में ,उठा शोर से ,
नींद आ रही है , मुझको जोर से ,
पैर क्या बेचारे कुछ भी बोलते ,
हो गए थे मोटे , थोड़े डोलते ,
गर्म पानी में नमक सा डालकर ,
उनको डाला ,खुल गए वो पोर से ,
नींद आ रही है , मुझको जोर से ,
नींद में भी तंग है दिन की कहीं ,
उठ गए , उड़ सी गयी कमबख्त ही ,
रात है सुनसान सी सनसन करे।
बिखरी यादें है समेटे होड़ से ,
नींद आ रही है , मुझको जोर से ,
आज जग गया था मैं तो भोर से।
आज जग गया था मैं तो भोर से ,
सारे दिन तो भागता मैं यूँ फिरा ,
सर पे डाले बोझ ,यूँ उठा -गिरा ,
सुबह से हुई जो शाम न खबर ,
सो गया था राह में ,उठा शोर से ,
नींद आ रही है , मुझको जोर से ,
पैर क्या बेचारे कुछ भी बोलते ,
हो गए थे मोटे , थोड़े डोलते ,
गर्म पानी में नमक सा डालकर ,
उनको डाला ,खुल गए वो पोर से ,
नींद आ रही है , मुझको जोर से ,
नींद में भी तंग है दिन की कहीं ,
उठ गए , उड़ सी गयी कमबख्त ही ,
रात है सुनसान सी सनसन करे।
बिखरी यादें है समेटे होड़ से ,
नींद आ रही है , मुझको जोर से ,
आज जग गया था मैं तो भोर से।
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