तंग है जिंदगी , कुछ भी हासिल नहीं ,
तंग है जिंदगी , कुछ भी हासिल नहीं ,
तंग है जिंदगी , कुछ भी हासिल नहीं ,
छोड़ दें लग रहा , हरेक पल है यही ,
कश्मकश में फँसी ,है भंवर में धंसी ,
थक गयी है लड़े कितना , ढह न जाये कहीं ,
आंच ऐसी लगी ,सुलगी सुलगी फिरे ,
चूल्हा ठंडा पड़ा , पानी छींटे गिरें
चूल्हा ठंडा पड़ा , पानी छींटे गिरें
राख उड़ है रही ,मुठ्ठी में बांध लूं ,
इससे पहले कि कुछ कसक रह जाये कहीं
इससे पहले कि कुछ कसक रह जाये कहीं
तंग है जिंदगी , कुछ भी हासिल नहीं ,
छोड़ दें लग रहा , हरेक पल है यही ,
कोई नहीं गिला ,किसी से रखे है अब ,
उम्मीद की किरण, गोया बुझ चुकी है जब
कोई नहीं गिला ,किसी से रखे है अब ,
उम्मीद की किरण, गोया बुझ चुकी है जब
हर इक सुबह वही है ,वही है शाम अब ,
कुछ भी नया नहीं है, राहों में घूमे वहीँ ,
कुछ भी नया नहीं है, राहों में घूमे वहीँ ,
तंग है जिंदगी , कुछ भी हासिल नहीं ,
छोड़ दें लग रहा , हरेक पल है यही
शाना नहीं है कोई सर , रखके रोलें हम
हाले दिल बताएं किसे , जुबां सीके रख्खे हम ,
बेपरवा सांसे तेज चलें ,लड़खड़ायें कदम
रस्ते का पता है नहीं , मंजिल का पता नहीं ,
तंग है जिंदगी , कुछ भी हासिल नहीं ,
शाना नहीं है कोई सर , रखके रोलें हम
हाले दिल बताएं किसे , जुबां सीके रख्खे हम ,
बेपरवा सांसे तेज चलें ,लड़खड़ायें कदम
रस्ते का पता है नहीं , मंजिल का पता नहीं ,
तंग है जिंदगी , कुछ भी हासिल नहीं ,
छोड़ दें लग रहा , हरेक पल है यही
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें