मंगलवार, 23 अगस्त 2016

अहसास 32 -जिंदगी

अगर जिंदगी का गणित मुझे जरा सा आता ,
मैं भी एक अग्रणी में  गिना जाता ,

कुछ भी हासिल नहीं , हासिल ही नहीं जुड़ा ,
समय के साथ साथ ,मैं भी तो बढ़ जाता ,
अगर जिंदगी का गणित ..............

पलट के देख लें , हिम्मत नहीं हुई ,
लम्हात  कुछ ख़ुशी के , काश मैं भी गिन  पाता,
अगर जिंदगी का गणित ..............

चल तो रहा हूँ  यकीकन , पर हूँ वहीँ खड़ा ,
मंजिलों के रास्ते तय , मैं भी कर पाता ,
अगर जिंदगी का गणित .............

मौसमों के हिसाब से , हवायों के रुख पता नहीं
उम्र बढ़ रही हैं बस , मौसम से पता चल जाता,
अगर जिंदगी का गणित मुझे जरा सा आता ,
मैं भी एक अग्रणी में  गिना जाता।


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