मिटटी की सोंधी खुशबू लिए, पुरवाई आई कहाँ से ,
पंछी करे है ,शोर क्यों इतना ,आने को कोई कहाँ से।
मिटटी की सोंधी खुशबू लिए, पुरवाई आई कहाँ से।
दूर आसमानो में बादल हैं घुमड़े ऐसे ,
स्वागत में हों खड़े वो ,ख़ुशियों को लेके जैसे ,
देखा है क्या उन्होंने ,मेरे पिया को आते
मन की व्यथा को मेरे येही उन्हें बताते,
बेचैन व्याकुल कितनी ,किससे कहलाऊं यहाँ से ,
पंछी करे है ,शोर क्यों इतना ,आने को कोई कहाँ से।
मिटटी की सोंधी खुशबू लिए, पुरवाई आई कहाँ से ,
पंछी करे है ,शोर क्यों इतना ,आने को कोई कहाँ से।
सनसन चलें हवाएं , खड़खड़ करें किवाड़ें ,
करवट बदलती रातें ,आँखों में उनकी यादें
आहट लगे है धोखा , लगता है वो यहीं हैं ,
हाथो से बोलते है , पलटू कहीं नहीं हैं,
कैसे संदेसा भेजू ,कैसे उन्हें बताऊँ ,आना उन्हें वहां से,
पंछी करे है ,शोर क्यों इतना ,आने को कोई कहाँ से।
पंछी करे है ,शोर क्यों इतना ,आने को कोई कहाँ से।
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जवाब देंहटाएंThis is about deep feeling of a woman , who is thinking intensly about her beloved in rainy season ,coated with love , hope and .......
जवाब देंहटाएंmashallah!! bahut khoob :)
जवाब देंहटाएंbahut bahut Dhanyawaad .
हटाएंthanks
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